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Thursday, July 29, 2010

घायल परवाना

लगती है यह बात तो अफसाना
उस समय शमा का बुझ जाना
जब आधा जला था परवाना

रह-रह परवाना कहता है
जाने कब जल पाउँगा ?

यादों के नजराने भी हैं,
जख्मों के खजाने भी हैं,
आखों के पैमाने भी हैं,

लेकिन कौन उठाएगा यह
किसके आगे छलकाउंगा ?

दिल में चोटों का अम्बार लिये,
सांसों में मौत का गुबार लिये,
हाथों में टूटा सितार लिये,

वीराने में ले घायल दिल
कब तक उड़ पाउंगा ?

2 comments:

  1. लगती है यह बात तो अफसाना
    उस समय शमा का बुझ जाना
    जब आधा जला था परवाना

    wahh !!!

    रह-रह परवाना कहता है
    जाने कब जल पाउँगा ?

    अत्यंत सुन्दर रचना ,,,बेहतरीन ,,लाजवाब ....!!!

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  2. लगती है यह बात तो अफसाना
    उस समय शमा का बुझ जाना
    जब आधा जला था परवाना
    ..अनूठी कल्पना.

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