लगती है यह बात तो अफसाना
उस समय शमा का बुझ जाना
जब आधा जला था परवाना
रह-रह परवाना कहता है
जाने कब जल पाउँगा ?
यादों के नजराने भी हैं,
जख्मों के खजाने भी हैं,
आखों के पैमाने भी हैं,
लेकिन कौन उठाएगा यह
किसके आगे छलकाउंगा ?
दिल में चोटों का अम्बार लिये,
सांसों में मौत का गुबार लिये,
हाथों में टूटा सितार लिये,
वीराने में ले घायल दिल
कब तक उड़ पाउंगा ?
Thursday, July 29, 2010
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लगती है यह बात तो अफसाना
ReplyDeleteउस समय शमा का बुझ जाना
जब आधा जला था परवाना
wahh !!!
रह-रह परवाना कहता है
जाने कब जल पाउँगा ?
अत्यंत सुन्दर रचना ,,,बेहतरीन ,,लाजवाब ....!!!
लगती है यह बात तो अफसाना
ReplyDeleteउस समय शमा का बुझ जाना
जब आधा जला था परवाना
..अनूठी कल्पना.