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Thursday, July 29, 2010

सागर भरता है दीवाना


..........चराग तले अन्धेरा नहीं होता
लोग कह देते हैं,वहाँ गए बगैर
ध्यान से सुनता हूँ,मगर सुन नहीं पाता.
तुम सुन लेते हो,मेरे कहे बगैर.


दीवाने की दिल की बस्ती , दीवाना ही देख सके
जग के सारे दीवानों को,स्वागत करता है दीवाना !

पी पी कर कितने दीवाने,हैं चले गए मयखाने से
मयखानों में दीप जलाता,ज़िंदा रहता है दीवाना !

येक धडकन पर दीवाना रोता,और दूजे पर हंस देता है
और धडकन का ही साज उठा,गाता चलता है दीवाना !

डूबा है नशे में दीवाना, दुबायेगा वो औरों को भी
रीता ना होता पीने से,सागर भरता है दीवाना !

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