
..........चराग तले अन्धेरा नहीं होता
लोग कह देते हैं,वहाँ गए बगैर
ध्यान से सुनता हूँ,मगर सुन नहीं पाता.
तुम सुन लेते हो,मेरे कहे बगैर.
दीवाने की दिल की बस्ती , दीवाना ही देख सके
जग के सारे दीवानों को,स्वागत करता है दीवाना !
पी पी कर कितने दीवाने,हैं चले गए मयखाने से
मयखानों में दीप जलाता,ज़िंदा रहता है दीवाना !
येक धडकन पर दीवाना रोता,और दूजे पर हंस देता है
और धडकन का ही साज उठा,गाता चलता है दीवाना !
डूबा है नशे में दीवाना, दुबायेगा वो औरों को भी
रीता ना होता पीने से,सागर भरता है दीवाना !


वाह !
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