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Monday, August 2, 2010

अंगूर हुआ जाता हूं


मैं मधुवन में रहकर भी, मधुवन से दूर हुआ जाता हूं.
दुनियांदारी के चक्कर में, चूर-चूर हुआ जाता हूं.

किसको बतलाऊं अपनी, ये हालत, कैसे बतलाऊं ?
आँखों के रहते भी मैं, बस एक सूर हुआ जाता हूं.

आगत और विगत का देखो जाल बना है चारों ओर
एक छोटी तितली की तरह, मैं मजबूर हुआ जाता हूं.

ऐ साकी ! मत बहला मुझको, हाथों में अब सागर दे दे
इतना पिउं की मुझको लगे, मैं अंगूर हुआ जाता हूं.

5 comments:

  1. gajal ki sundar prastuti ke liye bdhai.....

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  2. wah wah kya baat hai.........badhya

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  3. बहुत खूब, वाह!


    एक निवेदन:

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..जितना सरल है इसे हटाना, उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये.

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. धन्यवाद.वर्ड-वेरिफिकेसन हटा चुका हुँ.

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