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Saturday, August 14, 2010

तोडके आओ तो

तुम दरवाजों को झकझोरते हो केवल
तोड़ के आओ तो कोई बात बने.

गुबार फैले है और जले हैं
दीवार सारे इसके काले हैं.

नई तस्वीर कोई टांगने से क्या होगा
इन्हें बुहारो तो कोई बात बने.

गढे मुर्धों की भयानक चीखें
मडराती रहती हैं यहाँ.
छायाएं भूत के प्रेतों की
इठलाती रहती हैं येहां.

सुरीली आवाज में गाने से क्या होगा?
इन्हें भगाओ तो कोई बात बने.

3 comments:

  1. तुम दरवाजों को झकझोरते हो केवल
    तोड़ के आओ तो कोई बात बने.

    बहुत बढ़िया

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