अजब काम आंखें किये जा रही हैं!
महसूस कर दिल की वीरानियों को
और भीड़ की सख्त तन्हाइयों को
आवाज देखो दिये जा रही हैं!
चंदा की करनें औ सागर की लहरें
निर्जीव हो जब निगाहों से गुजरें
पलकों से नजरें सिये जा रही हैं!
Saturday, August 14, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


0 comments:
Post a Comment