
सुनो वो डूबता सूरज,क्या पैगाम देता है ?
पाती खून से लिखकर,तुम्हारे नाम देता है !
जगाकर प्यास किरणों की,कभी जो बुझ नहीं सकती,
वो साकी अरे तुमको,अंतिम जाम देता है !
आँखों को सिखाया,देखने की कला जिसने,
वही दीपक जलाने का,तुझको काम देता है !
लो अब चेत भी जाओ,वो तुम पे,तरस खाकर,
अंधेरी रात के पहले ,घडी-दो शाम देता है !


wah kya baat hai .
ReplyDeleteaapkee yr rachana bahut pasand aaee .
लो अब चेत भी जाओ,वो तुम पे,तरस खाकर,
अंधेरी रात के पहले ,घडी-दो शाम देता है !
ine panjtiyo ne to kamaal hee kar diya........
Aabhar
लो अब चेत भी जाओ,वो तुम पे,तरस खाकर,
ReplyDeleteअंधेरी रात के पहले ,घडी-दो शाम देता है !
...प्यारी नज़्म की शानदार पंक्तियाँ।
...सूरज लाख चेतावनी दे मगर हमने भी तय कर लिया है..नहीं सुधरेंगे..! रात रो-रो कर गुजारेंगे..नहीं सुधरेंगे।