....
चारों ओर
अन्धकार का साम्राज्य फैला हुआ है !
अंधेर ने
आसमान और धरती को येक कर दिया है.
कुत्ते भोंक रहे हैं,
सियार कभी कभी
वातावरण में कोलाहल करते हैं;
अँधेरे के शायद ये चैकीदार हैं,फ़ौज हैं.
उल्लू कभी-कभी
हू हू की डरावनी आवाज से
फिजां को चीर डालते हैं, शायद ये
अँधेरे के ओफिसर हैं.
अँधेरे के मंत्रीगण
दिखाई नहीं दे रहे
शायद उन्होंने अँधेरे की ही
शक्ल ओढ़ ली है चेहरों पर.
यैसे में
सन्नाटा अनुभव हो रहा है मुझे
कब्रिस्तान का,
और मैं खुद
शायद येक कब्र हूं !!
POSTED BY PREM BALLABH PANDEY AT 2:58 AM
3 COMMENTS:
बेचैन आत्मा said...
यह तो जंगलराज की भयावह तश्वीर है...!
AUGUST 6, 2010 7:27 AM
ZEAL said...
यैसे में
सन्नाटा अनुभव हो रहा है मुझे
कब्रिस्तान का,
और मैं खुद
शायद येक कब्र हूं !!...
गहरी अभिव्यक्ति...
आभार ।
.
OCTOBER 12, 2010 6:23 AM
R.Venukumar said...
कुत्ते भोंक रहे हैं,
सियार कभी कभी
वातावरण में कोलाहल करते हैं;
अँधेरे के शायद ये चैकीदार हैं,फ़ौज हैं.
उल्लू कभी-कभी
हू हू की डरावनी आवाज से
फिजां को चीर डालते हैं, शायद ये
अँधेरे के ओफिसर हैं.
bhi ] ek achchha vyangya afsershahi per--nice..
NOVEMBER 1, 2010 8:07 AM
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Monday, November 29, 2010
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