एक आग लगी है सीने मे
एक लुत्फ आ गया जीने मे.
दिख रहा है अक्स बहुत सुन्दर,
मंजिल का दिल के नगीने मे.
खुशबू के झोंके चले आये,
कहीँ पास से मेरे सफीने मे.
तेरी प्यास बुझेगी हार न दिल,
क्या देर है अब भी पीने मे ?
Monday, November 29, 2010
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