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Tuesday, December 7, 2010

तू है मेरा ....


मुझे क्यों न हो तेरी आरजू,
मुझे जिंदगी से प्यार है.......

कुछ ना जाने ये दिल मेरा,
कौन है तू,घर कहाँ है तेरा ?
पर लगता है जैसे मुझको,
तेरी बाहों ने है घेरा.

तेरी आहट सी सुनता हूं,
लगता है अब हुआ सवेरा.
एक अनजानी खुशबू आये,
चमन बन गया आज बसेरा.

यै ओशो तू जाने क्या है,
कुछ भी है,पर तू है मेरा.



मैं जाम हूं,
तू मुझमे भरा जा रहा है ...
आनंद के नशे की तरह !
मै बाँसुरी हूं,
तू उतर रहा है मुझमे
मधुर आवाज की तरह !
मै फूल हूं,
तू सुगंध की तरह
समाता जा रहा है !

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