पी के चले थे बरसों पहले,
अब तक होश न आया.
लगता है चल रही है महफ़िल,
साकी का है साया.
नील गगन के चाँद-सा चेहरा
आँचल में थे सितारे.
आँखों में गहरा सागर था
पलकें उसके किनारे.
सुन्दर से सुन्दर फूलों में
वो ही तो मुस्काया.
उसकी आहट बागीचे में,
मंदिर में और मस्जिद में.
झरनों की स्वर-लहरी में और
गाँव-शहर के घर-घर में .
उसकी अदाएं मुझको भाईं,
और तो कुछ भी न भाया.
Wednesday, December 8, 2010
Almost all are mad.....
Almost all are mads.
But in this world
There are not only peoples
But numerous other creatures
And numerous aspects of life.
And i feel pleasure
By swimming on the ocean of
Mysteries of this universe.
But in this world
There are not only peoples
But numerous other creatures
And numerous aspects of life.
And i feel pleasure
By swimming on the ocean of
Mysteries of this universe.
Tuesday, December 7, 2010
शीतल आग में......
Everything is wonderful !
You know nothing,
About anything.
You are beyond body and mind,
Not only you-
But everything.
वसंत की शुरुवात में
पेड़ों में से
निकलते हुये कोमल पत्तों की
खूबसूरती में खो जाओ.
चिड़ियों की मधुर बोली में
मिल जाओ.
चट्टानों से बहती नदी के
कलकल में मिट जाओ,या
किसी रूपसी के सौंदर्य में, या
किसी बच्चे के भोलेपन में,या
आसमान में बादलों में
आँख-मिचौली करते हुये
पूर्णिमा के चाँद की गोलाई में,या
झींगुर की धीमी-धीमी आवाज में
अपने आप को
पूरी तरह मिला दो.
अस्तित्व के रहष्य की गहराइयों में
गोते लगाते हुये
अस्तित्व को इतना महसूस करो कि
तुम न रहो अलग
अस्तित्व के साथ तुम भी एक हो जाओ.
मै को गायब हो जाने दो
समर्पण की सहलाती शीतल आग में.
You know nothing,
About anything.
You are beyond body and mind,
Not only you-
But everything.
वसंत की शुरुवात में
पेड़ों में से
निकलते हुये कोमल पत्तों की
खूबसूरती में खो जाओ.
चिड़ियों की मधुर बोली में
मिल जाओ.
चट्टानों से बहती नदी के
कलकल में मिट जाओ,या
किसी रूपसी के सौंदर्य में, या
किसी बच्चे के भोलेपन में,या
आसमान में बादलों में
आँख-मिचौली करते हुये
पूर्णिमा के चाँद की गोलाई में,या
झींगुर की धीमी-धीमी आवाज में
अपने आप को
पूरी तरह मिला दो.
अस्तित्व के रहष्य की गहराइयों में
गोते लगाते हुये
अस्तित्व को इतना महसूस करो कि
तुम न रहो अलग
अस्तित्व के साथ तुम भी एक हो जाओ.
मै को गायब हो जाने दो
समर्पण की सहलाती शीतल आग में.
तू है मेरा ....
मुझे क्यों न हो तेरी आरजू,
मुझे जिंदगी से प्यार है.......
कुछ ना जाने ये दिल मेरा,
कौन है तू,घर कहाँ है तेरा ?
पर लगता है जैसे मुझको,
तेरी बाहों ने है घेरा.
तेरी आहट सी सुनता हूं,
लगता है अब हुआ सवेरा.
एक अनजानी खुशबू आये,
चमन बन गया आज बसेरा.
यै ओशो तू जाने क्या है,
कुछ भी है,पर तू है मेरा.
मैं जाम हूं,
तू मुझमे भरा जा रहा है ...
आनंद के नशे की तरह !
मै बाँसुरी हूं,
तू उतर रहा है मुझमे
मधुर आवाज की तरह !
मै फूल हूं,
तू सुगंध की तरह
समाता जा रहा है !
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