न जाने कितनी भावनाएं !
शब्दों की तलाश में भटकती रहती हैं
दिल की गलियों में
बेचैनी से सिसकते हुये
लेकिन कोई आवाज
सुनाई नहीं देती किसि को.
कैसे ब्यक्त करूं मैं
इनकी बेचैनी
किसि पन्ने में ?
यैसा कोई शब्द मैं नहीं जानता.
ये भाषा का माध्यम भी
कितना अपूर्ण है !!
अपने दिल की बातों को
ब्यक्त करना
कितना कठिन है !!!
Sunday, May 8, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


सही है..अभिव्यक्ति के लिए अधूरी हैं भाषाएँ ..कुछ के ज्ञानी होने से अभिव्यक्ति पूर्ण भी तो नहीं हो सकती।
ReplyDelete