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Thursday, May 19, 2011

Laligurans


लालीगुराँस फूलों की माला
जो नेपाल का राष्ट्रीय फूल है
तुम्हारे चरणों में
अर्पित है
मेरे ह्रदय के साथ.

ह्रदय ही क्यों
मै ही सम्पूर्ण
तुम्हे अर्पित होना चाहता हूं
मगर यह "मैं"
न जाने कब
इसे सार्थक होने देगा ?

यह तो मेरे बस में नहीं है न.
मैं ही कैसे अर्पित करूं अपनेआपको
मेरे करने के प्रयाश में ही
मैं आ जाता है.

2 comments:

  1. सही है। मैं ही बाधा है।
    जब मैं था तब हरी नहीं, अब हरी है मैं नाहीं
    सब अंधियारा मिटी गया, दीपक देख्या माहीं।

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  2. सत्य वचन। ये तो घर है प्रेम का ... "मैं" और "मम्" को छोडे बिना समर्पण कहाँ पूर्ण होता है।

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