तेरे जाने के बाद,कोई तेरे जैसा नहीं.
मेंरे जाने के बाद कोई मेरे जैसा नहीं.
फूल,फल, चाँद, तारे अनेकों यहाँ,
यै प्रेम सुन,कोई यैसा- वैसा नहीं.
फूल खिलता है एक,बस खिलने के लिये,
और दूसरा खिलता है महकने के लिये.
दर्द से दुनियां तो घबराती है बहुत !
काम आता है ईश्क में ये सवँरने के लिये.
दूर से आती हवा में धुल आई,देख ली !
बहार में मैंने खिजां की,अंगडाई देख ली !!
घर से चला था,सुबह को,सोचकर सूरज को मै,
मगर अमावस के रात की,ये सियाही देख ली !!
देखने को मैं चला था,प्यार उनकी आँख में,
स्वार्थ की,कैसे कहूँ,मैंने काई देख ली !!
दर्द बढता ही गया,दिल का मकां खाली रहा,
चीखते विराने की मैंने,तन्हाई देख ली !!
कोई कहता था कि देखो,जिंदगी है बेवफा,
आज जीते जी ही मैंने,बेवफाई देख ली !!
Friday, June 10, 2011
Subscribe to:
Post Comments (Atom)


This comment has been removed by a blog administrator.
ReplyDelete