Follow by Email

Friday, June 10, 2011

तेरे बिन चांदनी .....

शाम है और हवा में खुशबू है
तेर आँचल की याद आती है.
फूलों को जहां भी देखूं,
तेरी सूरत वहीं,दिख जाती है.

आसमानी था तेरा दामन,
रुखसार तेरा गुलाबी था,
तेरी आखों का,तेरे होठों का,
आलम भी कुछ शराबी था.

जब भी सोचा तेरे सौंदर्य पे लिखूं,
तू कागज़ में बलखाती है.

लिखने को तुझपे गीत कोई
शायर भी उठे तो शर्माए.
तेरी तस्वीर बनाने के लिये
इन्द्रधनुष आके छुप जाये.

अब तो आजा मेरी जाने-जिगर !
तेरे बिन चांदनी मुझे जलाती है.

2 comments:

  1. जवानी के गीत हैं या गीतों ने जवानी दी है ?

    ReplyDelete
  2. अभी तो मैं जवान हूं प्यारे देवेन्द्र्जी .

    ReplyDelete