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Tuesday, July 19, 2011

दरिया-ए-दिल में,डूब-डूब तैरता रहा !
सुबहो-शाम,खूब-खूब तैरता रहा !
तेरी आँखों की कसम ,ओ मेरी जान-ए-जिगर !
तेरी आँखों के समुद्र में,एक दूब तैरता रहा !

इधर-उधर,जिधर भी जाये नजर !
तेरी अदाओं का सिलसिला कायम है.
तेरी मुस्कान,तेरी हँसी,
तेरी बातों का, काफिला कायम है.

बैठा रहूँ या चलता रहूँ,या कुछ भी करूँ
तेरी लहरों में ही,ये महबूब,तैरता रहा !

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