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Tuesday, July 19, 2011

ये गीत हैं,ये कुछ गजलें हैं....

सुर,छंद और लय मिल जायें जहां
फिर कौन कमी रह जाये वहाँ !

ये गीत हैं,ये कुछ गजलें हैं,
ये तो सागर की लहरें हैं.

सब भूल के तू अब डूब यहाँ !

सुर-साधक की ये धडकन हैं,
रचने वाले की तडपन हैं.

बांधा है गायक ने ये समां !

1 comments:

  1. सुन्दर भाव प्रस्तुति ,बधाई . .

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